छेड़ दो तार (काव्य संग्रह)

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छेड़ दो तार

छेड़ दो तार वीणा के हे शारदे
मन में दीपक प्रभा का दमकने लगे
खिल उठें सारी कलियाँ
पवन झूम ले
गुन गुनायें ये पंक्षी
गगन चूम ले
प्यार ही प्यार हो
हर दिशाओं में अब

छेड़ दो तार

छेड़ दो तार वीणा के हे शारदे
मन में दीपक प्रभा का दमकने लगे
खिल उठें सारी कलियाँ
पवन झूम ले
गुन गुनायें ये पंक्षी
गगन चूम ले
प्यार ही प्यार हो
हर दिशाओं में अब

छेड़ दो तार

छेड़ दो तार वीणा के हे शारदे
मन में दीपक प्रभा का दमकने लगे
खिल उठें सारी कलियाँ
पवन झूम ले
गुन गुनायें ये पंक्षी
गगन चूम ले
प्यार ही प्यार हो
हर दिशाओं में अब

छेड़ दो तार

छेड़ दो तार वीणा के हे शारदे
मन में दीपक प्रभा का दमकने लगे
खिल उठें सारी कलियाँ
पवन झूम ले
गुन गुनायें ये पंक्षी
गगन चूम ले
प्यार ही प्यार हो
हर दिशाओं में अब

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